
अजीत मिश्रा (खोजी)
मर्यादा को ‘बूटों’ तले रौंदने वाले साहब पर कार्रवाई कब?
सोमवार 26 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।
बस्ती।। राष्ट्र के मान-सम्मान के प्रतीक तिरंगे के सामने जब पूरा देश नतमस्तक होता है, तब बस्ती जिले से आई एक तस्वीर ने व्यवस्था और नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) मंडल बस्ती के अधीक्षण अभियंता मोहम्मद खालिद सिद्दीकी द्वारा जूता पहनकर झंडारोहण करने का मामला सामने आया है। यह केवल एक ‘चूक’ नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव के प्रति घोर संवेदनहीनता है।
🔥नियमों की अनदेखी या पद का अहंकार?
‘भारतीय ध्वज संहिता’ (Flag Code of India) स्पष्ट रूप से राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और गरिमा बनाए रखने का निर्देश देती है। हालांकि, इसमें जूतों को लेकर लिखित प्रतिबंध की बात तकनीकी रूप से भले ही उलझी हो, लेकिन भारतीय परंपरा और “प्रोटोकॉल” के अनुसार, ध्वज फहराते समय जूते उतारना सम्मान प्रकट करने का एक मानक तरीका माना जाता है।
एक वरिष्ठ श्रेणी के अधिकारी, जिनके कंधों पर अनुशासन बनाए रखने की जिम्मेदारी है, उनका इस तरह का व्यवहार अधीनस्थ कर्मचारियों और समाज के बीच क्या संदेश देता है?
🔥कौन सी कार्रवाई होनी चाहिए?
ऐसी लापरवाही पर केवल स्पष्टीकरण मांगना पर्याप्त नहीं है। इस मामले में निम्नलिखित कदम उठाए जाने चाहिए:
👉विभागीय जांच और निलंबन: शासन को तत्काल प्रभाव से इस कृत्य की जांच करानी चाहिए और जांच पूरी होने तक अधिकारी को पद से हटाना चाहिए।
👉प्रतीकात्मक दंड: राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान के मामले में दोषी पाए जाने पर सेवा पुस्तिका (Service Book) में प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज की जानी चाहिए।
👉सार्वजनिक माफी: विभाग के प्रमुख होने के नाते उन्हें अपने इस कृत्य के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई अन्य अधिकारी ऐसी धृष्टता न करे।
जब हम ‘अमृत काल’ की बात करते हैं और घर-घर तिरंगा फहराने का आह्वान करते हैं, तो ऐसे में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की ऐसी ‘महारानी’ शैली देश की भावनाओं को आहत करती है। क्या ऊर्जा विभाग के ये ‘साहब’ कानून और परंपराओं से ऊपर हैं? बस्ती प्रशासन और यूपी सरकार को इस पर कड़ा कड़ा रुख अपनाना चाहिए।


















